अय्यामे फातमी की मजलिस में पुरसेदारों की नम हुई आंखें

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बेटी के आने के साथ ही घर में खुदा की रहमत बरसने लगती है : मौलाना हामिद साहब

कलम हिन्दुस्तानी
शमीम अंसारी

किरतपुर ( मेमन सादात)। जनपद बाजनौर के ग्राम मेमन सादात में शिया समुदाय के लोगों ने शनिवार से घरों में काले परचम लगाए और काले लिबास पहने। अय्यामे फातिमी के दो रोज़ मजालिस का सिलसिला शनिवार की सुबह से ही शुरू हो गया। हमज़ा चौक स्थित इमाम बारगाह मामा में मजालिस का आयोजन हुआ।
शनिवार की सुबह दोपहर और रात मे तीन मजालिस हुईं।जिसमे मुसलमानों के आखरी नबी मोहम्मद साहब की बेटी जनाबे फात्मा जहरा की शहादत दिवस पर समुदाय के लोगों के बीच मजलिस में मौलाना हामिद मुर्तज़ा साहब ने कहा की इस्लाम की रक्षा में जनाबे फात्मा जहरा का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में महिलाओ का बड़ा महत्व है। बेटी घर में पैदा हो तो घर जन्नत हो जाता है। शादी के बाद वह पति घर जाती है तो आधा ईमान मुकम्मल कर देती है। यही औरत जब मां बनती है तो उसके पैरों के नीचे जन्नत होती है। मौलाना ने आगे कहा की बेटी के आने के साथ ही घर में खुदा की रहमत बरसने लगती है। इनकी पैदाइश पर मायूस न हो कर खुश होना चाहिए। अल्लाह ने हदीसे किसा में एक बेटी के जरिये ही पंजतन पाक को पहचनवाया है। ताकि लोग जान लें कि बेटियों की अहमियत क्या होती है। मोहम्मद साहब जब परेशान होते थे तो अपनी बेटी फात्मा के घर जाया करते थे, बेटी के घर ही उन्हें सुकून मिला करता था। मौलाना ने फात्म जहरा के मसाएब पढ़े। अजादारों की आंखों से आंसू बहने लगे।
अय्यामे फातिमी कमेटी मेमन सादात की जानिब से मजालिस का आयोजन किया गया है। कमेटी के सदस्य हाजी मंसूर अली ने बताया कि शनिवार की सुबहा से शाम तक तीन मजालिस हुई हैं जिसमे मेमन सादात के मरसियेखानों ने मरसियेख्वानी की और मजलिस से पहले कुरानखानी की गयी। पहली मजलिस मौलाना मौ सालिम साहब ने दूसरी मजलिस मौलाना हसन मुजतबा साहब और तीसरी मजलिस मौलाना हामिद मुर्तज़ा साहब ने पढ़ी। इसी तरह रविवार की सुबह से रात तक तीन मजालिस का सिलसिला जारी रहेगा और आखरी मजलिस के बाद नौहेख्वानी व सीनाज़नी होगी जिसमे मेमन सादात की सभी मातमी अन्जुमने नौहेखानी करेंगी।

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